नक्सली कमांडर गणपति के तेलंगाना में होने की सूचना, जल्द कर सकता है सरेंडर


जगदलपुर  / नक्सलियों के शीर्ष नेता और माओवादी सेंट्रल कमेटी के पूर्व मुखिया गणपति उर्फ लक्ष्मण राव के आत्मसमर्पण की बुधवार को भी पुष्टि नहीं हो सकी। इस बात के संकेत जरूर मिल रहे हैं कि तेलंगाना पुलिस के साथ वह संपर्क में है और अगले दो से तीन दिनों के अंदर उसके समर्पण की घोषणा हो सकती है। नक्सलियों की वजह से होने वाले नुकसान को समाप्त करने की दिशा में गणपति का समर्पण बहुत बड़ी सफलता साबित हो सकती है।


80 साल के गणपति पर 36 लाख रुपये का इनाम घोषित है। काफी कम लोगों ने ही उसे सार्वजनिक रूप से देखा है। खबरों के मुताबिक गणपति सरेंडर के लिए पुलिस के संपर्क में है। हालांकि, सरेंडर को लेकर अधिकारिक तौर पर पुष्टी नहीं हुई है। पिछले दो दिन से खबर है कि गणपति तेलंगाना में सरेंडर करना चाह रहा है, लेकिन वहां के अफसर इस पर अधिकारिक तौर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।


1979 से नहीं आया पुलिस के हाथ









तेलंगाना के करीमनगर जिले के सारंगपुर निवासी गणपति 30 साल से माओवादी आंदोलन में सक्रिय है। वह लंबे समय तक माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सचिव रहा। वर्ष 2018 में स्वास्थ्यगत कारणों से उसने इस्तीफा दे दिया था। गणपति को 1977 में पहली बार पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में 1979 में उसे जमानत पर रिहा किया गया। इसके बाद से वह कभी पुलिस के हाथ नहीं आया।


बीमारी की वजह से सरेंडर




जानकारों का कहना है कि गणपति अधिक उम्र की वजह से नक्सल गतिविधियों से भी दूर हो गया है। इसके अलावा वह बीमार भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वह इलाज के उद्देश्य से सरेंडर कर रहा है। बीते कुछ वर्षो में नक्सलियों के कई शीर्ष नेता या तो मारे जा चुके हैं या गिरफ्तार हो चुके हैं। ऐसे में अब नक्सली आंदोलन के बिखरने की परिस्थितियां बनती जा रही हैं।



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