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दिल्ली की अदालत ने तिहाड़ प्रशासन के कथन पर जताई हैरानी, कहा- उमर को जेल से बाहर निकलने की दी जाए अनुमति
October 24, 2020 • Anil Kumar

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जेल अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आरोपी को नियमों के अनुसार जेल से बाहर निकलने की अनुमति दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अदालत को भविष्य में ऐसी कोई शिकायत प्राप्त न हो।

 

नयी दिल्ली /  दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को हैरानी जताते हुए कहा कि तिहाड़ जेल प्राधिकारियों का यह कथन ‘अजीब’ और ‘विचित्र’ है कि जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को जिस सेल में रखा गया है वह ऐसी जगह है जहां से आधे से अधिक वार्ड की गतिविधियां नजर आती हैं। खालिद को गत फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों में ‘‘सुनियोजित’’ षड्यंत्र से संबंधित एक मामले में गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जेल अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आरोपी को नियमों के अनुसार जेल से बाहर निकलने की अनुमति दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अदालत को भविष्य में ऐसी कोई शिकायत प्राप्त न हो। खालिद ने बृहस्पतिवार को अदालत को बताया था कि उसे उसकी कोठरी में अकेले रखा गया है, उसे बाहर कदम रखने की अनुमति नहीं है और किसी से मिलने अनुमति नहीं है। 

 

खालिद ने आरोप लगाया कि उसे सुरक्षा के नाम पर एकांत कारावास में रखा जा रहा है। तिहाड़ जेल अधीक्षक ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि खालिद को अन्य कैदियों की तरह सभी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। जेल अधीक्षक ने अपने जवाब में कहा, ‘‘वह सेल जहां कैदी (खालिद) को रखा गया है, वह ऐसी जगह पर स्थित है, जहां से आधे से ज्यादा वार्ड की हलचल दिखाई देती है।’’ इस पर, न्यायाधीश ने जेल प्रशासन से कहा, ‘‘मैं इस पर आश्चर्यचकित हूं। इस कथन का उद्देश्य क्या है? यह कहना विचित्र बात है। यह अजीब है।’’

खालिद के वकील ने कहा, ‘‘क्या वह (खालिद) चिड़ियाघर का कोई जानवर है जिसे एक पिंजरे में बंद किया गया है जहां वह लोगों को देख सकता है और लोग उसे देख सकते हैं, लेकिन वह बाहर नहीं जा सकता है...।’’ अधीक्षक ने कहा कि इसका यह मतलब नहीं है बल्कि इसका मतलब यह है कि उसे ऐसी जगह रखा गया है जहां से वह लोगों की आवाजाही को देख सके ताकि वह ऊब न जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि लगाए गए आरोप निराधार हैं और सत्य नहीं हैं और उसके द्वारा की गई गतिविधियों का विवरण प्रदान किया गया। इसमें चिकित्सकीय जांच के बाद उसके जेल में आने की तिथि शामिल थी और जब उसने परिवार के सदस्यों को कैदियों की कॉल करने की व्यवस्था से कॉल किया था। साथ ही उसके अधिवक्ता के साथ बातचीत, चिकित्सकीय इलाज और उसके द्वारा कैंटीन की सुविधा का इस्तेमाल भी इसमें शामिल हैं। 

इसमें कहा गया कि आरोपी द्वारा अदालत के समक्ष उल्लेखित सभी चिंताओं का उचित समाधान किया गया है और उसे पुस्तकें, कपड़े, विधिक बातचीत के समय हेडफोन मुहैया कराया गया तथा कोविड-19 से संबंधित नियमों के पालन के साथ दैनिक गतिविधियां संचालित करने दिया गया। जेल नंबर दो के अतिरिक्त अधीक्षक प्रदीप शर्मा के आदेश का हवाला देते हुए जेल प्रशासन ने कहा, ‘‘यह आदेश केवल आंतरिक प्रसार के लिए था, केवल, खालिद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।’’

आदेश में यह कहा गया था कि आरोपी को 24 घंटे के लिए जेल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जब न्यायाधीश ने खालिद से पूछा कि क्या उसे बाहर जाने की अनुमति दी जा रही है, तो उसने कहा, ‘‘जब मैंने इस मुद्दे को अदालत के संज्ञान में लाया, तब चीजें बेहतर हुई हैं। मुझे बाहर कदम रखने की अनुमति है। जेल अधीक्षक मुझसे मिलने आए और खुद मुझे इधर उधर ले गए। इससे पहले, यह विशेष कर्मचारियों के विवेक पर छोड़ दिया गया था कि मुझे बाहर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। कई घंटों तक अनुरोध के बाद मुझे आधे घंटे के लिए अनुमति दी जाती थी।’’ 

खालिद ने आगे कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से हालात खराब थे और मैंने अतिरिक्त जेल अधीक्षक प्रदीप शर्मा का वह आदेश देखने के बाद अदालत के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं, जिसमें कहा गया था कि मुझे 24 घंटे के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’’ इस पर न्यायाधीश ने जेल अधीक्षक से कहा, ‘‘आपको स्थिति का जायजा लेने और व्यक्तिगत रूप से इन चीजों को देखने की जरूरत है... मुझे भविष्य में इस तरह की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।’’

न्यायाधीश ने खालिद को भी सहयोग करने का निर्देश दिया क्योंकि उसकी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने 17 अक्टूबर को तिहाड़ जेल अधीक्षक को न्यायिक हिरासत में उसे पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश आरोपी द्वारा जेल में पर्याप्त सुरक्षा की मांग के लिए दायर एक आवेदन पर आया है ताकि उसे न्यायिक हिरासत में किसी के द्वारा नुकसान न पहुंचाया जाए। इस बीच, अदालत ने मामले में खालिद और जेएनयू छात्र शरजील इमाम की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक बढ़ा दी। सुनवाई के दौरान, खालिद और इमाम के वकील ने हिरासत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस ने न्यायिक हिरासत के विस्तार के लिए कोई नया आधार नहीं बनाया है।

Source:Agency News