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एस.आई.टी के रडार पर फर्जी गुरू जी
September 3, 2020 • Anil Kumar

शिक्षा के मंदिर में फर्जी गुरूओं ने अपने पैर जमाकर शिक्षा को भी बदनाम और दिशाहीन करके रख दिया है ऐसे में नौनिहालों के मुस्तकबिल पर अंधेरा छाने लगा है। देश के अंदर माफियाओं की बाढ़ सी आ गई है नतीजा ये हुआ कि कोई भी ऐसा महकमा नहीं बचा जहां माफियाओं ने अपने पंजे न गड़ा रखे हों लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक हैं वे लोग जो अपनी शैक्षिक योग्यता को छिपाकर दूसरों के शैक्षिक प्रमाणप़त्रों पर नौकरी हथियाकर मलाई काट रहें हैं लेकिन अब ये मुन्नाभाई एस.आई.टी के रडार में हआ गये तो एक नहीं कई मामलों की पर्तें खुलने लगी है। ऐसा ही कुछ हरिद्धार में भी सामने आया है जहां शिक्षा विभाग में भर्ती हुए कई शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की एसआईटी जांच में कई बड़े खेल उजागर हुए हैं। बीटीसी की डिग्री बदायूं कॉलेज में जमा होने के बावजूद एक शिक्षक ने अपने हाथों से फर्जी डिग्री बनाकर नौकरी पा हथिया ली जबकि असली मालिक डिग्री लेने आज तक कॉलेज नहीं पहुंचा है।

एसआईटी अब असली डिग्री धारक को तलाशने में जुटी है। एक अन्य मुन्ना भाई ने झांसी से चोरी हुए शैक्षिक प्रमाणपत्रों के बल पर शिक्षक की नौकरी हथिया रखी थी। इनके अलावा चार अन्य की डिग्री भी अमान्य पाई गई है।
शिक्षा विभाग में अमान्य डिग्री से नियुक्ति के मामले की जांच कर रही एसआईटी की जांच में हरिद्वार जिले के शिक्षकों की भर्ती में बड़े खेल सामने आ रहे हैं।
जिले में तैनात शिक्षक मुरादाबाद निवासी ऋषिपाल दूसरे ऋषिपाल के नाम पर नौकरी कर रहा था। शिकायत के बाद एसआईटी की टीम शिक्षक ऋषिपाल की बीटीसी की डिग्री के सत्यापन को बदायूं तक गई। एसआईटी प्रभारी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि बीटीसी करने वाला ऋषिपाल आज तक अपनी डिग्री लेने नहीं आया है।

बीटीसी की डिग्री कॉलेज में ही है। सत्यापन में ऋषिपाल की ओर से जमा कराई डिग्री फर्जी पाई गई है। उन्होंने बताया कि एसआईटी अब डिग्री के असली मालिक का पता लगाने में जुटी है। हालांकि ऋषिपाल अभी भी अपनी डिग्री को सही बता रहा है।

एक अन्य शिक्षक चोरी के शैक्षिक प्रमाणपत्रों पर नौकरी करते हुए पाया गया है। एसआईटी को शिकायत मिली थी कि खानपुर के शेरपुर बेला के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक अशोक का असली नाम शीशपाल हैए जो अशोक कुमार की डिग्री पर नौकरी कर रहा है। जांच के दौरान यह तस्दीक हुआ कि शिक्षक अशोक का असली नाम शीशपाल है।

एसआईटी ने डिग्री मालिक अशोक कुमार को ढूंढकर बातचीत की तो पता चला कि उसकी शिक्षा बागपत टटीरी में हुई। बाद में रोहतक के महर्षि दयानंद विवि से बीएड की। 1990 में दिल्ली से बंगलूरू जाते समय झांसी के पास ट्रेन में शैक्षिक प्रमाणपत्रों का बैग चोरी हो गया जिसकी रिपोर्ट झांसी के आरपीएफ थाने में दर्ज है। बाद में इन्हीं डिग्री के आधार पर शीशपाल ने अशोक के नाम पर नौकरी पाई। राजकीय कन्या पाठशाला गणेशपुर हरिद्वार के अध्यापक कृष्णा यादव की डिग्री भी जांच में अमान्य मिली है।हरिद्वार में अब तक 38 की डिग्री मिली अमान्य
एसआईटी जांच में अब तक 100 से अधिक शिक्षकों की डिग्री अमान्य पाई गई है। इनमें सबसे ज्यादा शिक्षक हरिद्वार जिले के हैं। अब तक 38 शिक्षकों के खिलाफ एसआईटी कार्रवाई की संस्तुति कर चुकी है। जिले में अभी कई और शिक्षकों की डिग्री सवालों के घेरे में है।

एसआईटी जांच में शिक्षकों की डिग्री को लेकर बड़े घालमेल सामने आ रहे हैं। हरिद्वार और रुद्रप्रयाग जिले के तीन.तीन शिक्षकों की डिग्री अमान्य पाई गई है। इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश शिक्षा विभाग को भेजी जा रही है।
. मणिकांत मिश्राए प्रभारी एसआईटी

रुद्रप्रयाग के तीन शिक्षकों की बीएड डिग्री मिली अमान्य

रुद्रप्रयाग जिले के तीन शिक्षकों की डिग्री भी फर्जी मिली है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय रायडी रुद्रप्रयाग में तैनात शिक्षक महेंद्र सिंहए जनता जूनियर हाईस्कूल जखन्याल रुद्रप्रयाग के सहायक अध्यापक रघुबीर सिंह और राजकीय प्राथमिक विद्यालय जखोठ के सहायक अध्यापक मलकराम की बीएड डिग्री अमान्य पाई गई है।

परवान चढ़ी अमर उजाला की मुहिम

शिक्षा विभाग में अमान्य डिग्री से भर्ती के खेल का अमर उजाला ने तीन साल पहले भंडाफोड़ किया था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अमर उजाला की मुहिम का संज्ञान लेकर सीबीसीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे की अगुवाई में एसआईटी गठित की थी।

शुरुआती जांच में शिक्षा विभाग ने असहयोग किया तो एसआईटी प्रभारी चौबे ने शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय से शिकायत की थी। शिक्षा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद एसआईटी को शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन को सौंपे गए थे। चौबे ने 67 शिक्षकों की डिग्री को अमान्य पाया था। इसके बाद एएसपी सरिता डोभाल ने जांच को आगे बढ़ाया। अब आईपीएस मणिकांत मिश्रा कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाने में जुटे हैं।

Source: Amarujala