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एतिहासिक दिन- कपूरथला के किला सराय में 100 साल बाद शुकराने की नमाज
November 17, 2020 • Anil Kumar

कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी में मुगल बादशाह अकबर द्वारा बनवाए गए कि किला सराय में 100 वर्ष के बाद शुकराने की नमाज अदा की गई। श्री गुरु नानक देव जी ने यहीं सच्ची नमाज का अर्थ समझाया था।

कपूरथला /  सुल्तानपुर लोधी में मुगल शासक अकबर की ओर से बनवाए गए ऐतिहासिक किला सराय में 100 साल बाद शुकराने की नमाज अदा की गई। सोमवार को यहां प्रसिद्ध सूफी संत गुलाम हैदर कादरी के नेतृत्व में 125 मुस्लिम समुदाय के लोग व उलेमा पहुंचे और उन्होंने नमाज-ए-शुकराना पढ़ी। ये सभी गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाशोत्सव के लिए मालेरकोटला से यहां आए थे। 

पिछले सौ साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब किला सराय परिसर में नमाज अदा की गई हो। आजादी के बाद से यह किला सरकार की देखरेख में है। इन दिनों यहां पंजाब पुलिस का थाना चल रहा है। करीब 600 साल पहले इसी जगह श्री गुरु नानक देव जी ने दौलत खां लोधी व काजी को 'सच्ची नमाज' का अर्थ सिखा उन्हें गलती का एहसास करवाया था। आज उस जगह गुरुद्वारा अंतरजात्मा बनाया गया है।

गुलाम हैदर कादरी ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने संदेश दिया था कि जिस समय नमाज अदा करते हैं तब मन सिर्फ अल्लाह से जुड़ा होना चाहिए। समाज में फैली नफरत को गुरु नानक देव के दिखाए मार्ग पर चलकर ही दूर किया जा सकता है। उसी कारण आज 100 बाद वे श्री गुरु नानक देव जी का शुकराना करने पहुंचे हैं कि उन्होंने पूरे समाज को 'सच्ची नमाज' का सही अर्थ समझाया था।

 

...तो इकट्ठे क्यों नहीं हो सकते

बाबा सुखदेव सिंह जी डेरा रुमी वालों की अगुवाई में भाईचारे का संदेश देता कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि हम रेलगाड़ी में इकट्ठे सफर करते हैं। एक ही संस्थान में काम करते हैं। एक ही बाजार में खरीदारी करते हैं तो मंदिर, मस्जिद व गुरुद्वारा में इक्ट्ठे क्यों नहीं हो सकते। पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल व बाबा तजिंदर सिंह ने भी एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने का आह्वान किया। बाबा बलविंदर सिंह कुराली वाले, डॉ. नसीर अख्तर व शहजाद हुसैन ने कहा कि हर धर्म इंसानियत का संदेश देता है।

सच्ची नमाज का इतिहास

सुल्तानपुर लोधी के मुसलमान एक दिन इकट्ठे होकर गुरु नानक देव जी पास आकर कहने लगे कि अगर आप सभी के साझे गुरु हैं, तो हमारे साथ शाही मस्जिद में चलकर नमाज अदा करें। मस्जिद में पहुंचकर नवाब व काजी अपनी मर्यादा अनुसार घुटनों के बल झुक कर नमाज पढऩे लगे, जबकि गुरु नानक देव सीधे खड़े रहकर नमाज में शामिल हुए।

 

नमाज अदा कर उन्होंने गुरु जी को कहा कि आप ने हमारे साथ नमाज नहीं की तो गुरु जी ने कहा कि आप तो यहां थे ही नहीं। आप के साथ नमाज कैसे अदा करता। काजी ने कहा कि आप बताएं कि मैं कहां था। बाबा नानक ने कहा कि काजी साहिब आप का मन तो आप की घोड़ी की तरफ था। उसका बछेरा कुएं में न गिर जाए। नवाब साहिब तो काबुल, कंधार में अच्छी नस्ल के घोड़े खरीदने में लगे थे, तो नवाब ने कहा कि बिल्कुल सही है। तभी वह दोनों गुरु जी चरणों पर झुक गए।

 

किले के सामने गुरुद्वारा साहिब

किला सराह में एक सफेद मस्जिद भी है, जिसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया गया है। इसी मस्जिद में शाहजहां के बेटे औरंगजेब व दारा शिकोह की तालीम हुई थी। 400 गज चौड़े और 450 गज लंबे क्षेत्रफल में बने किले के मध्य में मुगल सुल्तान के अहलकारों (सेवादार) के लिए निवास स्थान बने हुए हैं। गुरुद्वारा अंतरजात्मा इसी किले के सामने करीब सौ मीटर की दूरी पर बनाया गया है। 

Sources:JNN