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खुले में फेंका जा रहा क्वारंटाइन सेंटर का कूड़ा,लापरवाह हुआ सिस्टम
September 21, 2020 • Anil Kumar

देहरादून / कोरोना से निपटने के लिए शासन-प्रशासन तमाम मानकों और व्यवस्थाओं के दावे तो कर रहे हैं। लेकिन, सिस्टम की लापरवाही भी बरकरार है। बिधोली स्थित क्वारंटाइन सेंटर का कूड़ा खुले में फेंका जा रहा है। स्थानीय लोग इस पर आपत्ति जता रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से कूड़े का उचित निस्तारण करने की मांग की है।

बिधोली में प्रशासन की ओर से क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। जहां बाहर से आने वाले या कोरोना लक्षण पाए जाने वाले व्यक्तियों को रखा जा रहा है। उन्हें भोजन और पानी भी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन यहां कूड़े के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं है। स्थानीय निवासी आकाश कुमार ने बताया कि क्षेत्र में खुले में क्वारंटाइन सेंटर का बचा हुआ खाना, डिस्पोजल आदि फेंक दिए जा रहे हैं। जिसे बंदर, कुत्ते आदि खा रहे हैं। साथ ही कूड़ा बीनने वाले भी इसमें प्लास्टिक की बोतलें खोजते हैं। ऐसे में उन्हें और क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यहां कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था की जाए। बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को क्षेत्रवासियों की ओर से ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

 

कोविड केयर सेंटर में गंदगी, रहना मुश्किल

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच व्यवस्थाएं एक-एक कर ध्वस्त होने लगी हैं। बजट की कोई कमी नहीं है और सरकार भी यह दम भर रही है कि इंतजाम पूरे हैं। पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हम बात कर रहे हैं राजधानी देहरादून की, जहां सरकारी नुमाइंदे हर दिन बैठकें कर कई तरह के दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं।

दून में महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में बनाए गए कोविड-केयर सेंटर की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं। जिसमें साफ दिख रहा है कि किस तरह मरीज गंदगी में रहने को मजबूर हैं। फर्श पर गंदगी इतनी कि लगता है कई दिन से झाड़ू ही नही लगी है। इसके अलावा भी कई अव्यवस्थाएं दिख रही हैं। कहीं बिस्तर पर खाली बोतलें पड़ी हैं, तो कहीं बिस्तर पर चादर तक नहीं है। 

 

कोविड केयर सेंटर में मेज कुर्सियां भी बेतरतीब ढंग से रखी गई हैं। राजधानी का यह हाल है तो अन्य जगह की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह स्थिति भी तब है, जब कुछ दिन पहले इसी कोविड-केयर सेंटर में कई घंटे बिजली गुल रही थी। जिस कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। उच्चाधिकारियों ने सुधार के दावे जरूर किए, पर तमाम बातें हवा हवाई साबित हुई। उधर, सेंटर प्रभारी डा. आनंद शुक्ला का कहना है कि यहां नियमित सफाई की जाती है। मरीजों को हर दिन नई चादर दी जाती है। उन्हें भी व्यवस्था बनाने में सहयोग करना चाहिए।

Source:Agency news