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लखनऊ जिला जेल की सुरक्षा में चूक- बंदी के पास मिला मोबाइल,अपराधियों की कराता था बात
November 19, 2020 • Anil Kumar

बंदी के पास मोबाइल मिलने की जानकारी होने के बाद भी जेल प्रशासन ने मामले को दबाए रखा। इसकी सूचना जब कर्मचारियों से बाहर लोगों को हुई तो सोशल मीडिया पर यह बात फैल गई।

 

लखनऊ /  राजधानी की जिला जेल में दीपावाली पर बंदी अंकित मिश्रा के पास मोबाइल मिलने हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी होते ही जेल प्रशासन ने आनन-फानन में बंदी अंकित को सिक्योरिटी बैरक में डाल दिया। जेल प्रशासन ने अंकित के पास से चार्जर बरामद कर लिया है। वहीं, मोबाइल की तलाश में बैरकों की तलाशी ली जा रही है। अंकित हत्या के मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद है।

जेल प्रशासन ने दबाए रखा मामला

जेल में बंदी के पास मोबाइल मिलने की जानकारी होने के बाद भी जेल प्रशासन ने मामले को दबाए रखा। इसकी सूचना जब कर्मचारियों से बाहर लोगों को हुई तो सोशल मीडिया पर यह बात फैल गई। इसके बाद जेल मुख्यालय में डीजी आनंद कुमार को मामले की जानकारी हुई तो जांच और जेल की सघन तलाशी और कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

अपराधियों की कराता था मोबाइल से बात

जेल सूत्रों के मुताबिक मामला खुलने पर जेल अधिकारियों ने आरोपित अंकित को पकड़ा और उसकी तलवा परेड शुरू की। इस दौरान अंकित ने बताया कि उसने किन-किन अधिकारियों की कहां-कहां और किससे बात कराई है। इसको लेकर अधिकारियों ने अलर्ट जारी कर दिया है।

रिश्वत के आरोप में हटे जेलर ने बंदी को बनाया था राइटर 

जेलर दफ्तर के कार्यों की लिखापढ़ी के लिए जेल बन्दियों को लम्बरदार और राइटर बनाया जाता है। जेल से सितंबर में किसानों से रिश्वत लेने के मामले में हटाए गए जेलर अरुण कुमार ने बंदी अंकित मिश्रा को जेलर दफ्तर का राइटर बनाया था। बंदी अंकित, जेलर अरुण कुमार का काफी करीबी था।

'बंदी अंकित मिश्रा जेलर दफ्तर का राइटर है। उसके पास ड्यूटी के दौरान मोबाइल का चार्जर मिला था। उसके बॉस मोबाइल नहीं था इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। मोबाइल की बरामदगी के लिए जेल की बैरकों में तलाशी जारी है। वहीं, बंदी अंकित को हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है और जेल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।' 

 - आशीष तिवारी, जिला जेल अधीक्षक लखनऊ 

 

Sources:JNN