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पटाखे से झुलसी सांसद रीता बहुगुणा जोशी की आठ साल की पौत्री का निधन
November 17, 2020 • Anil Kumar

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी की आठ साल की पोती की सोमवार की आधी रात में निधन हो गया। रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी की 6 साल की बेटी किया सोमवार को बच्चों के साथ पटाखे छुड़ाते समय जल गई थी। इसके बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान उसका निधन हो गया।

बता दें कि रीता बहुगुणा जोशी प्रयागराज संसदीय सीट से बीजेपी की सांसद हैं। सोमवार की शाम तकरीबन 4.30 बजे बच्चों के साथ पटाखे छुड़ाते समय रीता बहुगुणा जोशी की पोती जल गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया। उसे तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया था।

सांसद ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव से बात कर बच्ची को एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाने की तैयारी कर ली थी। मंगलवार सुबह बच्ची को दिल्ली ले जाना था। लेकिन आधी रात 1.30 से 2 बजे के आसपास बच्ची को सांस लेने में तकलीफ हुई और फिर डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। सांसद के इकलौते बेटे मयंक लखनऊ से सोमवार की रात में ही सीधे दिल्ली पहुंच गए थे। 

आधी रात बच्ची के निधन होने की सूचना मिलने के बाद मयंक दिल्ली से प्रयागराज रवाना हो गए। इस घटना से सांसद के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। सांसद डॉ. रीता जोशी अपने पति पीसी जोशी के साथ दीपावली पर प्रयागराज आवास पर आईं थीं। 

सांसद के मीडिया प्रभारी अभिषेक शुक्ल ने बताया कि बच्चे घर की छत पर खेल रहे थे। इस दौरान पटाखा फटने से किया बुरी तरह घायल हो गई। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके 60 प्रतिशत तक जलने की जानकारी दी। आपकों बता दें कि मयंक की शादी 2007 में हुई थी और किया उनकी इकलौती बेटी थी।

कोरोना को हराया लेकिन पटाखे से हार गई मासूम
आठ साल की मासूम ने कोरोना को तो हरा दिया लेकिन पटाखे से हार गई। सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, बहू रिचा के साथ पोती किया 9 सितंबर को कोरोना पॉजीटिव पाई गई थी। जिसके बाद तीनों लोगों को पीजीआई लखनऊ से मेदांता दिल्ली शिफ्ट किया गया था। सांसद के पति पीसी जोशी का मेदांता पहले से इलाज चल रहा था। मासूम किया सितंबर के तीसरे सप्ताह में कोरोना से जंग जीतकर डिस्चार्ज हुई थी। दीपावली पर बच्चों के साथ किया भी चहक उठी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

 

Sources:Hindustan samachar